झूठ बोलने से बुद्धि भ्रष्ट होती है, मुनाफा नहीं मिलता
क्या आप जानते हैं कि झूठ बोलने से आपकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है और मुनाफा भी नहीं मिलता?
यह क्लिप सीधे-सीधे एक आम दुकानदार के झूठ बोलने के व्यवहार पर सवाल उठाती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। इसमें एक स्पष्ट विरोधाभास है जो भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है और समाज में व्याप्त बेईमानी पर प्रकाश डालता है।
चाहिए अपने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए एक नियम वली बना ले जैसे कुछ दुकानों का नियम होता है कि वहां फिक्स रेट होता है नहीं होता वहां ये नहीं चलेगा कि कसम से कहते हैं कि तुम्हें हम अपना जान कर के कि 00 रुपया मीटर य मिला है हम बिल्कुल मुनाफा नहीं ले रहे नहीं झूठ क्यों बोल रहे हो दुकान खोले मुनाफा के लिए झूठ क्यों बोल रहे हो नहीं लेंगे मुनाफा हम जितने का लाए उससे मुनाफा लेंगे पर 0 मीटर देंगे कपड़ा बढ़िया है ना फिट है इससे नीचे नहीं उतरेंगे हमें सफाई देने की जरूरत नहीं है कि हम कसम खाते हैं या ऐसा जानते हो बिजली है दुकान है नौकर लगे हैं तो इसका मुनाफा लेने के लिए दुकान खोले कोई दान करने के लिए तो नहीं तो सबको पता है मुनाफा लेगा लेकिन एक फिक्स दाम उसे 10 20 रप का मुनाफा लेकर के हम उसको बेच रहे ल
- दुकानदार का झूठ: बुद्धि और मुनाफे पर असर
- क्यों झूठ बोलना बंद करें?
- झूठ बोलने से
- बुद्धि भ्रष्ट होती है
- मुनाफा नहीं मिलता
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